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PRAGATIWADI ANDOLAN KA ITIHAS ( प्रगतिवादी आंदोलन का इतिहास ) hardcover

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KARAN SINGH CHAUHAN  (कर्ण सिंह चौहान )

जन्म-तिथि: 29 पफरवरी, 1948 को उत्तर प्रदेश वेफ बुलंदशहर जिले वेफ सदरपुर गाँव में जन्म।
शिक्षा: स्कूल की पढ़ाई दिल्ली वेफ स्कूलों में, ” हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी में बी.ए. ऑनर्स और एम.ए., “दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.लिट. और पीएच.डी.।
अध्यापन कार्य: ” 1970 से विभिन्न पदों पर दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य, ” 1987 से 1991 तक सोपिफया विश्वविद्यालय, बल्गारिया वेफ प्राच्य विद्या विभाग में अतिथि प्रोपेफसर, ” 1999 से 2002 तक सिओल, कोरिया में हांवुफक विश्वविद्यालय वेफ भारत विद्या विभाग में अतिथि प्रोपेफसर, ” 2009 से 2011 तक पुनः कोरिया वेफ हांवुफक विश्वविद्यालय में अतिथि प्रोपेफसर वेफ रूप में, ” दिल्ली विश्वविद्यालय से 2012 में अवकाश प्राप्त।
लेखन: प्रमुख पुस्तवेंफ: समीक्षा: ” साहित्य के बुनियादी सरोकार, ” आलोचना के नए मान, ” एक समीक्षक की डायरी, ” हिंदी में साहित्यिक सैद्धांतिकी की समस्याएँ। यात्रा-वृत्तांत: ” यूरोप में अन्तर्यात्राएँ, ” अमेरिका वेफ आरपार, ” बल्गारिया में पाँच बरस, ” मेरा कोरिया प्रवास। संस्मरण: बिछुड़े सभी बारी-बारी। अन्य विधएँ: ” हिमालय नहीं है वितोशा ;कविता-संग्रहद्ध, ” यमुना कछार का मन ;कहानी-संग्रहद्ध, ” मजीद मियाँ और मारसल्ला का साल ;कहानी-संग्रहद्ध। अनुवाद: ” समकालीन यथार्थवाद: ज्यार्जी लूकाच, ” पहाड़ में पूफल: कोरियाई कविता-संग्रह, ” लू शुन की चुनी हुई रचनाएँ, ” इतिहास दृष्टि और ऐतिहासिक उपन्यास: लूकाच, ” मेरा जीवन-मेरा समय: पाब्लो नेरुदा की जीवनी, ” साहित्यिक इतिहास में संरचना और समाज: राबर्ट वेइमान, ” सोवियत लेखक कांग्रेस: 1934
अन्य: देश-विदेश की पत्रिकाओं में हिन्दी-अंग्रेजी में 100 से अधिक  लेख।

” यूरोप वेफ अनेक विश्वविद्यालयों में भारतीय साहित्य, संस्कृति और दर्शन पर अभिभाषण। ” वामपंथी राजनीतिक और साहित्य संगठनों में सक्रिय भागीदारी।

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‘प्रगतिवादी आंदोलन का इतिहास’ हिंदी में प्रकातशित पहली ऐसी पुस्तक हैं जो इस आंदोलन के साहित्य के विश्लेषण-मूल्यांकन से अधिक उसके संगठनात्मक और आंदोलनात्मक पक्ष पर ध्यान केन्द्रित करती है। यह इस आंदोलन का ऐसा पक्ष है जिस पर हिंदी की बहसों में गर्मा-गर्मी तो खूब रही, लेकिन उसका संपूर्ण ब्यौरा अनुपलब्ध रहा। लेखकों ने उसके साहित्य की समीक्षा के माध्यम से ही उसका खाका बनाने की कोशिश की। यह प्रक्रिया उल्टी थी जो संगठन और आंदोलन के विकास संबंध्ी जानकारी के अभाव में अभी तक जारी रही। जबकि इस आंदोलन के संबंध में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह थी कि यह निश्चित विचारधारा के आधर पर सोची-समझी रणनीति के तहत बनाए गए सांस्कृतिक संगठन के माध्यम से गतिशील था। इस मूल आधार और प्रक्रिया का अध्ययन उसके साहित्य की दशा और दिशा पर प्रकाश डालने में मददगार हो सकता था।
पुस्तक में संगठन के राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संदर्भों की विशद शोधपूर्ण जानकारी के अलावा तमाम संगठनात्मक गतिविधियों को संकलित करने का प्रयास किया गया है। साथ ही, परिशिष्ट में उससे संबंधित सभी मूल दस्तावेजों को दिया गया है, जो आगे की शोधों के लिए बड़े काम के हैं। एक अध्याय में उन महत्त्वपूर्ण मुद्दों को अलग से उठाया गया है, जो बहसों में अक्सर उठे हैं। पूरे आंदोलन का इतिहास एक सहज सूत्र में आद्यंत बंध, आकर्षक साहित्यिक भाषा और विश्लेषण से आलोकित है।

Weight 0.750 kg
Dimensions 24 × 14 × 2.5 cm

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