निराला के गद्य में उनके काव्य की समस्त प्रवृत्तियाँ संश्लिष्ट रूप में गूँथी हुई हैं जिनका भीतरी, सापेक्षिक और पूर्वापर सम्बन्ध उनके जीवन और व्यक्तित्व से जुड़ा हुआ है। वे सफल ही नहीं श्रेष्ठ गद्यकार हैं। उनके गद्य की आश्रयभूमि अत्यंत विस्तृत है। गद्य में उन्होंने अनेक नये प्रयोग किए हैं। उनकी प्रयोगधर्मिता की प्रवृति स्वाधीनता,परंपरा, संस्कृति और सामूहिक विकास जैसे मूल सूत्रों का ग्रहण कर आगे बढ़ती गयी है। काव्य की भाँति गद्य में भी उन्होंने ‘सामान्य की प्रतिष्ठा’ का प्रतिपादन किया और शोषण का विरोध किया।
निराला का गद्य सहज भी है, जटिल भी, प्रत्याशित भी है, अप्रत्याशित भी। यह गद्य-साहित्य हिन्दी की अमूल्य निधि है जिसका अवलोकन अपने आप में रोमांचक अनुभव है।
Criticism, Literature And Language
NIRALA KA GADYA-SAHITYA (निराला का गद्य-साहित्य) Hardcover
Original price was: ₹500.00.₹400.00Current price is: ₹400.00.
Author – Dr. Sujata N.Magadum
लेखक – डॉ. सुजाता न.मगदुम
| Weight | 0.750 kg |
|---|---|
| Dimensions | 23 × 13 × 3 cm |






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