आचार्य चतुरसेन की सर्वश्रेष्ठ कृति ‘वयं रक्षामः’ही है इसमें पुरा वैदिक काल से लेकर बुद्ध के आगमन के पहले तक के सभ्यता-संघर्ष को पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक सामग्री के आधार पर गहन विश्लेषण के साथ वित्रित किया है। महाकाव्य काल में खलनायक घोषित कर दिए गये रावण कां इस उपन्यास में बिलकुल अलग ही चरित्र सामने आया है। आचार्य ने बड़े साहस के साथ उस काल की ऐसी घटनाओं और प्रथाओं का चित्रण किया है,जिन्हें आज के नैतिक मानदंड पर नहीं आँका जा सकता है। उनमें सत्य का अनुसंधान करने की जरूरी सलाहियत के साथ.साथ उसका सामना करने का अद्भुत साहस भी है। रामायण और महाभारत के साथ वैदिक और उत्तर वैदिक कथाओं को आधुनिक नज़रिए से और तर्कसंगत ढ़ंग से प्रस्तुत किया गया है। भारतीय संस्कृति की विविधता को समझने की दृष्टि से भी इस उपन्यास का महत्त्व है। राक्षस संसकृति की श्रेष्ठता को भी पहली बार चिह्नित किया गया किया गया है। गंभीर विमर्श के बावजूद, भाषा सहज और शैली प्रवाहपूर्ण है। यह एक ऐसी कालजयी कृति है जिसकी लोकप्रियता निरंतर बढ़ती जा रही है।
Bestseller, Novel
VAYAM RAKSHAMH ( वयं रक्षामः ) Paperback
Original price was: ₹350.00.₹300.00Current price is: ₹300.00.
Author – Aacharya Chatursen
लेखक – आचार्य चतुरसेन






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