यह चिंतन की दुनिया में विधागत सीमाओं के अतिक्रमण की एक अनूठी किताब है! एक नयी किताब, जो समकालीन चिन्तन और इतिहास के कई मुद्दों को नए तरीके से सोचने एवं सूत्रबद्ध करने में मदद करती हैं।
पिछले कुछ दशकों में पूरी दुनिया में विकास की प्रक्रियाओं से जो बदलाव आये हैं, उसने कुछ मार्ग अवरुद्ध भी किये हैं और नए रास्ते खोले भी हैं। यात्रा, संस्मरण, डायरी आदि शैली में रचित यह किताब देश और दुनिया के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पिछले दो-तीन दशकों से ऐतिहासिक विकास की जो प्रक्रियायें चल रही हैं, उसे समझने में मदद करती हैं। यह किताब इस बात का प्रमाण है कि मनुष्य और उसके विचार कभी किसी एक बंधन में नहीं रहे हैं। खासकर, नए विषय से जुड़े शब्द और उसके कर्ता हमेशा सीमाओं का अतिक्रमण करते रहे हैं। इतिहास कभी सरहदों में बंधा नहीं होता है। क्रिएटिव हिस्ट्री के ग्रामीण इतिहास पर कार्य करते हुए पुस्तक के लेखकों को महसूस हुआ कि 1857 के पहले स्वाधीनता आन्दोलन या जनसमाज से जुड़े किसी भी विषय पर कार्य करने की जो प्रक्रिया है, उसे सिर्पफ पारम्परिक तरीके से न तो समझा जा सकता है और न ही लेखन के स्तर पर पूरा किया जा सकता है।
पुस्तक को पढ़ते हुए इतिहास की समझ विकसित करने के अनेक स्रोत एवं सूत्र पाठकों को यहाँ मिलेंगे जिनके सहारे कोई भी चिंतन विस्तार पाता है और वृहत्तर सामाजिक समूहों की चेतना का हिस्सा बनता है।
History, Latest Book
ITIHAS KI SARAHADEN ( इतिहास की सरहदें ) Paperback
Original price was: ₹400.00.₹350.00Current price is: ₹350.00.
Author – Rashmi Choudhary / Devendra Chaube
लेखक – रश्मि चौधरी / देवेन्द्र चौबे
| Dimensions | 23 × 13 × 2.5 cm |
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