‘‘ ‘तुलसी साहित्य’ को पढ़ते हुए बार-बार यह प्रश्न मन-मस्तिष्क में कौंधता है कि क्या तुलसीदास केवल अपने अन्तः करण के सुख के लिए (स्वान्तः सुखाय) रघुनाथगाथा रच रहे थे अथवा सर्वान्तः सुखाय और बहुत कुछ रच-गढ़ रहे थे? वे परम्परित राम-कथा की पुनरावृत्ति मात्र कर रहे थे अथवा उस कथा को अपने ढंग से – अपने अंदाज में – समय-समाज की जरूरत के हिसाब से- परिमार्जित कर प्रस्तुत कर रहे थे? सच मानिए तो तुलसीदास व्यक्ति-परिवार-समाज-राष्ट्र तथा समस्त भूमंडल को एवं समस्त मानव जाति और मानवेतर प्राणिजगत् को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है – इस दर्शन को दिमाग में रखकर अपने साहित्य का सृजन कर रहे थे। तुलसीदास के विषय में यह बात पूरी तरह प्रमाणित हो चुकी है कि वे परम्परित राम-कथा में नयी भाव-भंगिमा भरने का काम कर रहे थे। कथा में आए चरित्रों को नये ढंग से गढ़ने का कार्य कर रहे थे। कथा के मुताबिक तथा उसमें घटित क्रिया-कलापों के अनुसार उन्होंने विभिन्न पात्रों को – जो जैसा है – उसे उसी प्रकार उज्ज्वलता और स्याहता प्रदान करने का सफल प्रयत्न किया है।’’
Criticism, Latest Book, Philosophy
TULSI RAGHUNATHGATHA ( तुलसी रघुनाथगाथा ) Hardcover
Original price was: ₹750.00.₹600.00Current price is: ₹600.00.
Author – Dr. Shrikant Singh
लेखक – डॉ. श्रीकांत सिंह






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