नार्तगाथाएँ यों तो कॉकेशिया क्षेत्र की विभिन्न जनजातियों की पौराणिक निधि रही हैं लेकिन ओसेतिया के लोगों में ये गाथाएँ अपने मूल स्वरूप में अन्यों की तुलना में अधिक सुरक्षित रह सकी है। पहले सेंकडों वर्षों तक मौखिक रूप में पिफर 19वीं शताब्दी के मध्य से इन्हें लिपिबद्ध किये जाने के प्रयास शुरू हुए। अक्तुबर क्रांति के बाद विभिन्न जातियों के बीच प्रचलित रूपों के अध्ययन का क्रम आजतक चला हुआ है। इन गाथाओं पर फिल्में बनी हैं और विभिन्न भाषाओं में इनके अनुवाद हुए हैं, अब हिंदी में भी।
नार्त एक तरह से आज के ओसेतियाई लोगों के पौराणिक पूर्वज रहे हैं। इनमें वर्णित नायक एवं घटनाएँ हमारे देश की अपनी पुराकथाओं की तरह की हैं, विशेषकर हिमाचल के ऊपरी क्षेत्र की लोककथाओं की तरह की। विचार और व्यवहार, लोक और परलोक, नैतिक और अनैतिक की समझ-जीवन के सभी पक्षों में सादगी नार्त कथाओं को रोचकता प्रदान करती हैं।
नार्त नायक जितने देवतुल्य महामानव थे तो उतने ही महामानव उनके शत्रु, नार्तों का नभलोक से जललोक में निर्बाध आना-जाना रहता था उतना ही इहलोक से परलोक के बीच, जितना प्रेम और द्वेष मनुष्यों के बीच उतना ही मनुष्यों और मनुष्येतर प्राणियों के बीच।
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NART GATHAYEN – Osetiyai Purakathayen ( नार्त गाथाएँ: रूसी अनुवाद पर आधारित ओसेतियाई पुराकथाएँ) Paperback
Original price was: ₹350.00.₹300.00Current price is: ₹300.00.
Author – Varyam Singh
लेखक – वरयाम सिंह
| Weight | 0.450 kg |
|---|---|
| Dimensions | 24 × 14 × 2.5 cm |






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