‘इमारत की नींव’ प्रख्यात रूसी साहित्यकार आन्द्रेई प्लातोनव का सबसे चर्चित उपन्यास है। 1930 में लिखे गए इस उपन्यास पर सेंसर बोर्ड ने प्रकाशित होने पर रोक लगा दी थी। फिर प्लातोनव की मृत्यु के बाद साल 1969 में ही यह लोगों के हाथों तक पहुंच सका। उपन्यास में इंसानों का एक समूह कही किसी जगह एक ऐसे नींव का गड्ढा तैयार कर रहा है, जिस पर एक दिन खुशियों की इमारत खड़ी होगी। इसमें आन्द्रेई ने स्टालिन काल में आम जनमानस के विश्वास, मानवता और उनकी आशाओं को टूटते हुए दिखाया है जिसको लेकर स्टालिन और फेदेव ने तीव्र आलोचना की। दार्शनिक आन्द्रेई प्लातोनव ने प्रतीकवादी दृष्टिकोण अपनाते हुए मुख्य क़िरदार वश्योव के माध्यम से जोसेफ स्टालिन और नौकरशाही के निरंकुश शासन पर तीक्ष्ण कटाक्ष किया है।
कहानी का मुख्य पात्र वश्योव सत्य की खोज मे हर उस आदमी से संपर्क करता है जिसे उच्च शिक्षा प्राप्त हो या जनता का नेतृत्व करता हो। लेकिन सभी बिना सत्य को जाने एक निर्धारित योजना के अंतर्गत काम कर रहे है और जीवन की मौलिकता के स्मरण के बिना ही इस संसार मे भ्रमण कर रहे है।
Novel, Russian & Western Literature
IMARAT KI NEEV ( इमारत की नींव ) Hardcover
Original price was: ₹400.00.₹350.00Current price is: ₹350.00.
By Andrei Platonov ( आन्द्रेई प्लातोनव ) Translated by Suhail Akhtar & Subhash Kumar Thakur
| Weight | 0.450 kg |
|---|---|
| Dimensions | 24 × 14 × 2 cm |






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