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VIBHAJAN KI VIBHISHIKA: BHARATIYA KATHA SAHITYA ( विभाजन की विभीषिका : भारतीय कथा साहित्य ) Hardcover

Original price was: ₹800.00.Current price is: ₹650.00.

Author – Hariyash Rai

लेखक – हरियश राय

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देश के विभाजन से न सिर्फ मुल्क को बांटा गया बल्कि देश की कला, संस्कृति और इतिहास को भी बांट दिया गया। विभाजन से लोगों का देश छूटा और वे एक अजनबी देश में शरणार्थी और बेगाने बनकर जीने के लिए मजबूर हो गये। आर्थिक रुप से लोगों के निजी जीवन में विभाजन इतना गहरा था कि दो पीढ़ियाँ विभाजन का दंश झेलते हुए खप गईं। इतना ही नहीं आज भी यह दंश बरकरार है और देश के इतिहास में हमेशा बरकरार रहेगा।
इस विभाजन से देश की आजादी की लंबे संघर्ष के बाद कायम हुआ साम्राज्य विरोधी मोर्चा खत्म हो गया। इस मोर्चे के खत्म होते ही विभिन्न राज्यों में चल रहे संयुक्त जन-आंदोलन बिखर गये। देश की आजादी के लिए सैंकड़ों मुसलमानों का बलिदान बेमानी हो गया। पंजाब और बंगाल का सांस्कृतिक विकास कमजोर हो गया। आजादी की लड़ाई में सभी समुदायों की एकता छिन्न-भिन्न हो गयी। कश्मीरी जनता की आंतरिक एकता प्रभावित हुई। सिन्ध के लाखों आदमी बिना देश के हो गये।
भारतीय भाषाओं में विभाजन को लेकर लिखा गया साहित्य विभाजन की त्रासदी और इतिहास की बर्बर अमानवीय घटनाओं के खिलाफ इंसान की गरिमा के अनूठा दस्तावेज की तरह हमारे सामने है। यह किताब विभाजन के कारणों और विभाजन के संदर्भ में भारतीय कथा-साहित्य, नाटकों, फिल्मों को समझने में एक आधार भूमि के रुप में है।

Weight 0.750 kg

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