प्रख्यात स्वतन्त्रता सेनानी और समाज सुधारक आचार्य नरेन्द्रदेव का व्यक्त्वि बहुआयामी था। वे शिक्षाविद् और कानूनविद् होने के साथ-साथ भारतीय दर्शन और समाज के गहरे अध्येता भी थे। उन्होंने आजादी के बाद की युवा पीढ़ी को उच्च नैतिक और सामाजिक मूल्यों के साथ जीने की नयी राह दिखाई और सक्रिय राजनीति में रहते हुए भी समाजवादी मूल्यों को स्थापित करने का कठिन प्रयत्न किया।
एक लेखक के रूप में भी उनका स्थान बहुत ऊँचा है। ‘बौद्ध धर्म दर्शन’ तथा ‘राष्ट्रीयता और समाजवाद’ उनकी दो ऐसी पुस्तके हैं, जो उन्हें नेहरू और अम्बेडकर के समक्ष खड़ा कर देती हैं। विशेष रूप से ‘बौद्ध धर्म दर्शन’ जैसी पुस्तक हिन्दी तो क्या, किसी भी भारतीय भाषा में नहीं है। बौद्ध दर्शन के मूल ग्रन्थ सहज सम्प्रेष्य नहीं हैं। आचार्यजी ने घोर परिश्रम करके, उसके विभिन्न ग्रन्थों का मूल पाली भाषा में अध्ययन करके उस गूढ़ दार्शनिक विचारधारा को सर्वग्राह्य बनाया। दूसरी पुस्तक राष्ट्रीयता और समाजवाद भी भारत में समाजवादी आन्दोलन की जरूरत और उसकी दिशा को समझने के लिए एक मौलिक कृति है। केवल उनके जीवन और राजनीतिक कर्म को ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारत की राजनीतिक और सामाजिक यात्र को समझने के लिए भी इस पुस्तक को पढ़ा जाना चाहिए। उनकी अन्य पुस्तकें और समय-समय पर लिखे गये जरूरी लेख भी इतने ही महत्त्वपूर्ण हैं। ऐसे कठिन समय में, जबकि राजनीति से तमाम तरह के नैतिक और सामाजिक मूल्य गायब होते जा रहे हैं, आचार्य नरेन्द्रदेव की रचनावली का प्रकाशन एक स्वागत योग्य कदम है। इसके अध्ययन से नयी पीढ़ी को न केवल एक प्रतिष्ठित राजनेता के जीवन और सृजन, बल्कि बीसवीं सदी के पूरे समाज की वैचारिकी को जानने-समझने की दिशा मिलेगी।
History, Political Science, Sociology
AACHARYA NARENDRADEV RACHANAWALI SET OF 5 VOLS. ( आचार्य नरेन्द्रदेव रचनावली 5 खंडों में ) HB
Original price was: ₹9,500.00.₹7,600.00Current price is: ₹7,600.00.
Editior – Dr. Raghav Sharan Sharma
सम्पादक – डॉ. राघव शरण शर्मा
| Weight | 6 kg |
|---|---|
| Dimensions | 24 × 14 × 20 cm |






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